🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸
🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉
🌹*चिंतन लेखमाला*🌹
🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳
🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹
🌺🌺 *व्यसनमुक्त अणुवर्ती महेंद्र सिंह रावत*☘🌙
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
🌹 शृखला - 8 🌹व्यसनमुक्त अनुवर्ती महेंद्र सिंह रावत मुनि भूपेंद्र कुमार कौन सी प्रेरणा कब काम कर जाए इसका पता नहीं लगता है और जब वह प्रेरणा काम करती है तब जीवन के अंदर एक नया बदलाव अपने आप सामने आने लग जाता है परिवर्तन जीवन में अवश्य ही आता है पर कौन से समय पर आता है यह किसी को पता नहीं लगता है कुकर खेड़ा गांव के अंदर महेंद्र सिंह रावत जो एक अध्यापक का कार्य कर रहा था वह स्वयं व्यसन युक्त था और उसके पिताजी मोती सिंह जी रावत जो सेना के अंदर थे पर शराब के व्यसन से उन्होंने अपने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था उन्हीं के पदचिन्हों पर उनका सुपुत्र महेंद्र सिंह चलना प्रारंभ कर दिया था पर अध्यापक चांदमल जी मेहर उस के संपर्क में आते हैं अनुब्रत का आलोक उसको दिखलाती हैं और जीवन को व्यसन युक्त से व्यसन मुक्त बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं वह प्रेरणा महेंद्र सिंह के अंतकरण को छू जाती है और वह उसी समय संकल्प बद हो जाता है आज के पश्चात शराब का सेवन नहीं करूंगा उसी दिन से उसके जीवन में एक परिवर्तन का दौर प्रारंभ हो जाता है परिणाम यह आता है पूरा परिवार है वह व्यसनमुक्त बन जाता है आज उसके सुपुत्र अच्छी अच्छी पोस्टों पर काम कर रहे हैं स्वयं महेंद्र सिंह अर्जुन गढ नगर के अंदर अध्यापक का दायित्व निर्वहन कर रहा है व्यसन मुक्त जीवन अणुव्रत का एक महान आदर्श रहा है उस आदर्शों पर चलकर महेंद्र सिंह ने अपने जीवन में एक परिवर्तन ला कर पूरे रावत समाज के लिए एक आदर्श बन गया है ऐसा अणुवर्ती व्यसनमुक्त युवक जब सामने आते हैं तब ही आंदोलन की प्रतिष्ठा प्रतिष्ठित होती है
क्रमशः
🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸
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🌹*चिंतन लेखमाला*🌹
🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳
🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹
🌺🌺 *व्यसनमुक्त अणुवर्ती महेंद्र सिंह रावत*☘🌙
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🌹 शृखला - 8 🌹व्यसनमुक्त अनुवर्ती महेंद्र सिंह रावत मुनि भूपेंद्र कुमार कौन सी प्रेरणा कब काम कर जाए इसका पता नहीं लगता है और जब वह प्रेरणा काम करती है तब जीवन के अंदर एक नया बदलाव अपने आप सामने आने लग जाता है परिवर्तन जीवन में अवश्य ही आता है पर कौन से समय पर आता है यह किसी को पता नहीं लगता है कुकर खेड़ा गांव के अंदर महेंद्र सिंह रावत जो एक अध्यापक का कार्य कर रहा था वह स्वयं व्यसन युक्त था और उसके पिताजी मोती सिंह जी रावत जो सेना के अंदर थे पर शराब के व्यसन से उन्होंने अपने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था उन्हीं के पदचिन्हों पर उनका सुपुत्र महेंद्र सिंह चलना प्रारंभ कर दिया था पर अध्यापक चांदमल जी मेहर उस के संपर्क में आते हैं अनुब्रत का आलोक उसको दिखलाती हैं और जीवन को व्यसन युक्त से व्यसन मुक्त बनाने की प्रेरणा प्रदान करते हैं वह प्रेरणा महेंद्र सिंह के अंतकरण को छू जाती है और वह उसी समय संकल्प बद हो जाता है आज के पश्चात शराब का सेवन नहीं करूंगा उसी दिन से उसके जीवन में एक परिवर्तन का दौर प्रारंभ हो जाता है परिणाम यह आता है पूरा परिवार है वह व्यसनमुक्त बन जाता है आज उसके सुपुत्र अच्छी अच्छी पोस्टों पर काम कर रहे हैं स्वयं महेंद्र सिंह अर्जुन गढ नगर के अंदर अध्यापक का दायित्व निर्वहन कर रहा है व्यसन मुक्त जीवन अणुव्रत का एक महान आदर्श रहा है उस आदर्शों पर चलकर महेंद्र सिंह ने अपने जीवन में एक परिवर्तन ला कर पूरे रावत समाज के लिए एक आदर्श बन गया है ऐसा अणुवर्ती व्यसनमुक्त युवक जब सामने आते हैं तब ही आंदोलन की प्रतिष्ठा प्रतिष्ठित होती है
क्रमशः
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