*📒📕 तत्व ज्ञान -【01】 📗📘*
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*▪पहला बोल - गति चार ▪*
*हमने जाना कि लोक का निचला भाग अधोलोक कहलाता है। इस अधोलोक में सात पृथ्वियां है जो नरक कहलाती है। जिनके नाम है- धर्मा, वंशा, शैला, अञ्जना, रिष्टा, मघा और माघवती। रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, बालुकाप्रभा, पंकप्रभा, धुमप्रभा, तमःप्रभा और महातमःप्रभा इनके गौत्र है।*
*नरक भूमियों के नाम और गौत्र में अंतर है। नाम अनादिकालसिद्ध होता है और अन्वयरहित होता है। अर्थात् नाम में उसके अनुरूप गुण होना आवश्यक नहीं है, जबकि गौत्र गुणप्रधान होता है। नाम की अपेक्षा गौत्र की प्रधानता है। नरक भूमियों के गौत्र अर्थानुसार है, अतएव उनके अर्थ से स्पष्ट है कि-*
*1. रत्नप्रभा - पहली भूमि रत्नप्रधान होने से रत्नप्रभा कहलाती है। यह काले रंग के भयंकर रत्नों से व्याप्त है।*
*2. शर्कराप्रभा - दूसरी भूमि शर्करा (कंकड़) के सदृश होने से शर्कराप्रभा है। यहां की धरती भाले, बर्छी आदि से भी अधिक तीक्ष्ण कंकरों से व्याप्त है।*
*3. बालुकाप्रभा - तीसरी बालुका (रेती) की मुख्यता होने से बालुकाप्रभा है। यहाँ की जमीन भाड़ की गर्म रेत से भी अनन्तगुणी गर्म है।*
*4. पंकप्रभा - पंक का अर्थ होता है- कीचड़। तो यह भूमि कीचड़ की अधिकता होने से पंकप्रभा है। इसमे खून, मांस और पीप का कीचड है।*
*5. धूमप्रभा - पांचवी भूमि धूम (धुंए) की अधिकता होने से धूमप्रभा है। यहाँ राई, मिर्च के धुंए से भी अधिक सारा धुआं है।*
*6. तमःप्रभा - तमः याने अँधेरा। यहाँ घोर अँधेरा है। अन्धकार की विशेषता के कारण यह तम:प्रभा है।*
*7. महातम:प्रभा - सातवीं भूमि महातमः (घन- अंधकार) की प्रचुरता से महातमःप्रभा है। अर्थात यहाँ घोरातिघोर अँधेरा हरदम रहता है।*
*इस प्रकार सातों ही नरक पृथ्वीयों के नाम गुण निष्पन्न होते हैं।*
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*🙏आगम असम्मत्त कुछ भी लिखा हो तो तस्स मिच्छा मि दुक्कडं।*
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*▪पहला बोल - गति चार ▪*
*हमने जाना कि लोक का निचला भाग अधोलोक कहलाता है। इस अधोलोक में सात पृथ्वियां है जो नरक कहलाती है। जिनके नाम है- धर्मा, वंशा, शैला, अञ्जना, रिष्टा, मघा और माघवती। रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, बालुकाप्रभा, पंकप्रभा, धुमप्रभा, तमःप्रभा और महातमःप्रभा इनके गौत्र है।*
*नरक भूमियों के नाम और गौत्र में अंतर है। नाम अनादिकालसिद्ध होता है और अन्वयरहित होता है। अर्थात् नाम में उसके अनुरूप गुण होना आवश्यक नहीं है, जबकि गौत्र गुणप्रधान होता है। नाम की अपेक्षा गौत्र की प्रधानता है। नरक भूमियों के गौत्र अर्थानुसार है, अतएव उनके अर्थ से स्पष्ट है कि-*
*1. रत्नप्रभा - पहली भूमि रत्नप्रधान होने से रत्नप्रभा कहलाती है। यह काले रंग के भयंकर रत्नों से व्याप्त है।*
*2. शर्कराप्रभा - दूसरी भूमि शर्करा (कंकड़) के सदृश होने से शर्कराप्रभा है। यहां की धरती भाले, बर्छी आदि से भी अधिक तीक्ष्ण कंकरों से व्याप्त है।*
*3. बालुकाप्रभा - तीसरी बालुका (रेती) की मुख्यता होने से बालुकाप्रभा है। यहाँ की जमीन भाड़ की गर्म रेत से भी अनन्तगुणी गर्म है।*
*4. पंकप्रभा - पंक का अर्थ होता है- कीचड़। तो यह भूमि कीचड़ की अधिकता होने से पंकप्रभा है। इसमे खून, मांस और पीप का कीचड है।*
*5. धूमप्रभा - पांचवी भूमि धूम (धुंए) की अधिकता होने से धूमप्रभा है। यहाँ राई, मिर्च के धुंए से भी अधिक सारा धुआं है।*
*6. तमःप्रभा - तमः याने अँधेरा। यहाँ घोर अँधेरा है। अन्धकार की विशेषता के कारण यह तम:प्रभा है।*
*7. महातम:प्रभा - सातवीं भूमि महातमः (घन- अंधकार) की प्रचुरता से महातमःप्रभा है। अर्थात यहाँ घोरातिघोर अँधेरा हरदम रहता है।*
*इस प्रकार सातों ही नरक पृथ्वीयों के नाम गुण निष्पन्न होते हैं।*
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*🙏आगम असम्मत्त कुछ भी लिखा हो तो तस्स मिच्छा मि दुक्कडं।*
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