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*स्वर्गतुल्य / नरकतुल्य परिवार*

*स्वर्गतुल्य / नरकतुल्य परिवार*

परिवार सुन्दर भी हो सकता है और
वह असुंदर, कष्टयुक्त भी हो सकता है |

जिस परिवार में सहन करने की वृत्ति होती है,
वह परिवार स्वर्गतुल्य हो सकता है |

जिस परिवार में सहनशीलता नहीं होती,
बात-बात में कलह होता है,
मारपीट होती है,
वह परिवार अशांतिमय बन सकता है,
नरकतुल्य बन सकता है |

 *- परमश्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमणजी*

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