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🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉
🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹
🌻 *गाथा तपोवल*3 🌻 📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕
🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया* 🍁🍁
🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
🙏🙏🙏🙏🙏
🌹श्रृंखला 110 🌹
आचार्य भिक्षु का मेवाड़ के अंदर छोटे-छोटे गांव में विचरण होता रहा और उन गांव में सहजता सरलता और समर्पण लोगों के दिलों, दिमाग के अंदर भरि हुई थी ।सुलभ बोधि होने के कारण अनेकों व्यक्ति तेरापंथ के तत्वों को समझकर तेरापंथ की श्रद्धा को स्वीकार करना प्रारंभ कर देते हैं।
उन्हीं गांव के अंदर 1 गांव पिपलांत्री के पास के अंदर कडेजा का गुड़ा उस गांव के अंदर एक परिवार निवास करता था ।उस परिवार के मुख्य व्यक्ति थे शिव लाल जी बडोला उनकी धर्म पत्नी का नाम उमेदाजी था ।छोटा गांव था ।काश्तकारों के अधिकांश घर थे। केवल एक मात्र ओसवाल परिवार का घर होने से सारे गांव के लोग उनको श्रद्धा के साथ सेठ जी कह कर पुकारते थे ।
श्रावक रामलालजी भद्र प्रकृति के श्रावक थे। ग्रामीण जनों के साथ हिल मिलकर रहने वाले थे ।इसलिए उनकी वहां पर छोटी बड़ी दुकान वह ब्याज बट्टे का काम आराम से चलता रहता था ।गांव के अंदर शुद्ध हवा एक तरह से दवा का काम करती थी ।मन से प्रसन्न रहते थे ।इसलिए बीमारियां अधिकांशत: उनसे दूर ही रहती थी ।कडेजा का गुड़ा भूडान और पिपलांत्री गांव के मध्यवर्ती गांव होने के कारण अनेकों बार साधु-साध्वियों का वहां पर पदार्पण होता रहता था ।क्रमश:
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🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
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🌻 *गाथा तपोवल*3 🌻 📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕
🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया* 🍁🍁
🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
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🌹श्रृंखला 110 🌹
आचार्य भिक्षु का मेवाड़ के अंदर छोटे-छोटे गांव में विचरण होता रहा और उन गांव में सहजता सरलता और समर्पण लोगों के दिलों, दिमाग के अंदर भरि हुई थी ।सुलभ बोधि होने के कारण अनेकों व्यक्ति तेरापंथ के तत्वों को समझकर तेरापंथ की श्रद्धा को स्वीकार करना प्रारंभ कर देते हैं।
उन्हीं गांव के अंदर 1 गांव पिपलांत्री के पास के अंदर कडेजा का गुड़ा उस गांव के अंदर एक परिवार निवास करता था ।उस परिवार के मुख्य व्यक्ति थे शिव लाल जी बडोला उनकी धर्म पत्नी का नाम उमेदाजी था ।छोटा गांव था ।काश्तकारों के अधिकांश घर थे। केवल एक मात्र ओसवाल परिवार का घर होने से सारे गांव के लोग उनको श्रद्धा के साथ सेठ जी कह कर पुकारते थे ।
श्रावक रामलालजी भद्र प्रकृति के श्रावक थे। ग्रामीण जनों के साथ हिल मिलकर रहने वाले थे ।इसलिए उनकी वहां पर छोटी बड़ी दुकान वह ब्याज बट्टे का काम आराम से चलता रहता था ।गांव के अंदर शुद्ध हवा एक तरह से दवा का काम करती थी ।मन से प्रसन्न रहते थे ।इसलिए बीमारियां अधिकांशत: उनसे दूर ही रहती थी ।कडेजा का गुड़ा भूडान और पिपलांत्री गांव के मध्यवर्ती गांव होने के कारण अनेकों बार साधु-साध्वियों का वहां पर पदार्पण होता रहता था ।क्रमश:
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