🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸
🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉
🌹*चिंतन लेखमाला*🌹
🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳
🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹
🌺🌺*अनुशासनप्रिय अणुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत*☘🌙
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
⭐ता-24/8/2018 ⭐
⭐वार -शुक्रवार⭐
🌹 शृखला 9🌹अनुशासनप्रिय अनुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत मुनि भूपेंद्र कुमार जो व्यक्ति अनुशासन के हथियार को अपने हाथ में रखकर आगे बढ़ता है वह व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी असफल नहीं होता सफलता उसका इंतजार करती रहती है ऐसे ही एक अनुशासनप्रिय व्यक्तित्व भीलवाड़ा जिले के अंतिम गांव थाना के अंदर उभर कर आया मूल सिंह जी चुंडावत जिन्होंने अपने जीवन के अंदर अनुशासन को ही सब कुछ माना एक अनुशासन ने उनको शिखरों पर चढ़ा दिया था विद्या भूमि राणावास जहां काका केसरी का एक छत्र राज चल रहा था राणावास शिक्षा का एक महान केंद्र बिंदु बन गया था वह शिक्षा भूमि के नाम से प्रसिद्ध हो गया था उच्च शिक्षा भूमि के अंदर मूल सिंह जी चुंडावत अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए पहुंचे वहां पर सुमति शिक्षा सदन के वार्डन और बृहस्पति के रूप के अंदर उन्होंने सेवाएं प्रदान की राणावास इसलिए प्रसिद्ध था जो विद्यार्थी उदंड होते बदमाश होते उन विद्यार्थियों को राणावास में भर्ती कराया जाता था उन विद्यार्थियों को संभालना यह भी अपने आप के अंदर एक टेढ़ी खीर थी पर मूल सिंह जी चुंडावत ने अपने अनुशासन के कारण उन सारे विद्यार्थियों को एक डोर में बांधकर सुव्यवस्थित शिक्षा और संस्कारों का जागरण करते रहते थे जब आचार्य तुलसी का उनको योग मिलता है और उनकी एक झलक ने उनके पूरे जीवन को बदल कर रख दिया आंदोलन के जो नियम के उन नियमों को उन्होंने आत्मसात करने का प्रयास किया अनुशासन और अणुव्रत का अनुपम जीवन बन गया था मूल सिंह जी चुंडावत का उन्होंने अपने जीवन के अंदर कभी भी समझोता और झुकने का प्रयास नहीं किया अपने नियमों की रक्षा के लिए वह कुछ भी त्याग करने के लिए तत्पर हो जाते थे यह नियम निष्ठा देखकर पूरा चुंडावत परिवार ही नहीं राजपूत समाज है वह भी आश्चर्यचकित रह जाता था ऐसे नियम निष्ठ और अनुवृत्ति कार्यकर्ता समय-समय पर अणुव्रत आंदोलन को प्राप्त होती रहे उन्हें कार्यकर्ताओं के बलबूते पर अणुव्रत आंदोलन अपनी गति और प्रगति है वह हमेशा बनाए रखा सारे देश के अंदर अणुव्रत आंदोलन का एक तरह से शंखनाद करने वाले बन गए थे मूल सिंह जी चुंडावत हजारों हजारों विद्यार्थी उनके अनुशासन से निकलकर जब बाहर जाते विद्यार्थी अणुव्रत उनका का उनके जीवन पर बहुत बड़ा असर होता असर के कारण उन विद्यार्थियों का जगह जगह सम्मान भी होता रहता था अनुवृत्ति विद्यार्थी सरकारी कामों के अंदर बड़े-बड़े बड़े होदे के ऊपर पहुंचे पर वह विद्यार्थी भी इतने बड़े होने के पश्चात भी मूल सिंह जी चुंडावत को कभी भूलते नहीं थे और उनके बताए हुए अनुभव के संदेशों को वह हमेशा अपने सामने रखते अनुवृत्ति कार्यकर्ता मूल सिंह जी का स्मरण अणुव्रत आंदोलन को और ज्यादा ओजस्वी और तेजस्वी बनाने वाला है
क्रमशः
🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸
🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉
🌹*चिंतन लेखमाला*🌹
🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳
🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹
🌺🌺*अनुशासनप्रिय अणुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत*☘🌙
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
⭐ता-24/8/2018 ⭐
⭐वार -शुक्रवार⭐
🌹 शृखला 9🌹अनुशासनप्रिय अनुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत मुनि भूपेंद्र कुमार जो व्यक्ति अनुशासन के हथियार को अपने हाथ में रखकर आगे बढ़ता है वह व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी असफल नहीं होता सफलता उसका इंतजार करती रहती है ऐसे ही एक अनुशासनप्रिय व्यक्तित्व भीलवाड़ा जिले के अंतिम गांव थाना के अंदर उभर कर आया मूल सिंह जी चुंडावत जिन्होंने अपने जीवन के अंदर अनुशासन को ही सब कुछ माना एक अनुशासन ने उनको शिखरों पर चढ़ा दिया था विद्या भूमि राणावास जहां काका केसरी का एक छत्र राज चल रहा था राणावास शिक्षा का एक महान केंद्र बिंदु बन गया था वह शिक्षा भूमि के नाम से प्रसिद्ध हो गया था उच्च शिक्षा भूमि के अंदर मूल सिंह जी चुंडावत अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए पहुंचे वहां पर सुमति शिक्षा सदन के वार्डन और बृहस्पति के रूप के अंदर उन्होंने सेवाएं प्रदान की राणावास इसलिए प्रसिद्ध था जो विद्यार्थी उदंड होते बदमाश होते उन विद्यार्थियों को राणावास में भर्ती कराया जाता था उन विद्यार्थियों को संभालना यह भी अपने आप के अंदर एक टेढ़ी खीर थी पर मूल सिंह जी चुंडावत ने अपने अनुशासन के कारण उन सारे विद्यार्थियों को एक डोर में बांधकर सुव्यवस्थित शिक्षा और संस्कारों का जागरण करते रहते थे जब आचार्य तुलसी का उनको योग मिलता है और उनकी एक झलक ने उनके पूरे जीवन को बदल कर रख दिया आंदोलन के जो नियम के उन नियमों को उन्होंने आत्मसात करने का प्रयास किया अनुशासन और अणुव्रत का अनुपम जीवन बन गया था मूल सिंह जी चुंडावत का उन्होंने अपने जीवन के अंदर कभी भी समझोता और झुकने का प्रयास नहीं किया अपने नियमों की रक्षा के लिए वह कुछ भी त्याग करने के लिए तत्पर हो जाते थे यह नियम निष्ठा देखकर पूरा चुंडावत परिवार ही नहीं राजपूत समाज है वह भी आश्चर्यचकित रह जाता था ऐसे नियम निष्ठ और अनुवृत्ति कार्यकर्ता समय-समय पर अणुव्रत आंदोलन को प्राप्त होती रहे उन्हें कार्यकर्ताओं के बलबूते पर अणुव्रत आंदोलन अपनी गति और प्रगति है वह हमेशा बनाए रखा सारे देश के अंदर अणुव्रत आंदोलन का एक तरह से शंखनाद करने वाले बन गए थे मूल सिंह जी चुंडावत हजारों हजारों विद्यार्थी उनके अनुशासन से निकलकर जब बाहर जाते विद्यार्थी अणुव्रत उनका का उनके जीवन पर बहुत बड़ा असर होता असर के कारण उन विद्यार्थियों का जगह जगह सम्मान भी होता रहता था अनुवृत्ति विद्यार्थी सरकारी कामों के अंदर बड़े-बड़े बड़े होदे के ऊपर पहुंचे पर वह विद्यार्थी भी इतने बड़े होने के पश्चात भी मूल सिंह जी चुंडावत को कभी भूलते नहीं थे और उनके बताए हुए अनुभव के संदेशों को वह हमेशा अपने सामने रखते अनुवृत्ति कार्यकर्ता मूल सिंह जी का स्मरण अणुव्रत आंदोलन को और ज्यादा ओजस्वी और तेजस्वी बनाने वाला है
क्रमशः
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