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Showing posts from August, 2018

*अणुव्रत पथ के पथिक* *समर्पित कार्यकर्ता अणुव्रति विमल मूसरफ*

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                     🌹*चिंतन लेखमाला*🌹         🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺*समर्पित कार्यकर्ता अणुव्रति विमल मूसरफ*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻              ⭐ता-26/8/2018 ⭐                ⭐वार -रविवार ⭐                 🌹  शृखला-11🌹 समर्पित कार्यकर्ता अणुव्रती विमल मुसरफ जब तक व्यक्ति के मन में समर्पण की भावना नहीं जमती है तब तक वह अपने जीवन में विकास के द्वारों का उद्घाटन नहीं कर सकता है विमल मुसरफ एक ऐसा ही व्यक्ति है जिस व्यक्ति ने अणुव्रत के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया था चूरु जिले का राजगढ़ गांव उस गांव के अंदर मुसरफर परिवार के अंदर विमल ने जन्म लिया और सरदारशहर के अणुवर्ती कार्यकर्ता मोहन जी दसानि के संपर्क में आए और भारतीय संस्कार निर्माण समिति से उनक...

*बहुत कठिन है मार्ग तप का 113*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸      🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻                                      📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕                        🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                 🌹श्रृंखला 113 🌹    श्रावक शिव लाल जी आत्म चिंतन करने लग जाते हैं ।क्या अपने लड़के को गोद देना यह मेरे लिए अच्छा रहेगा?     ज्यों ही यह आत्म चिंतन का दौर प्रारंभ होता है तत्काल उन्होंने अपनी घरवाली को अपने निकट बुलाया ...

*अणुव्रत पथ के पथिक* *बंसीलाल जी सेवक*

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                     🌹*चिंतन लेखमाला*🌹         🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺*अणुव्रत को घर घर पहचानेवाले अणुव्रती बंसीलाल जी सेवक*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻              ⭐ता-25/8/2018 ⭐                ⭐वार -शनिवार⭐                 🌹  शृखला-10 🌹 अणुव्रत  को घर घर पहुंचाने वाले अणुवृत्ति बंसी लाल जी सेवक मुनि भूपेंद्र कुमार बंशीलाल सेवर एक ऐसी अणुव्रतीका नाम है जिस व्यक्ति ने आचार्य तुलसी के अवदानोको घर घर पहुंचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया था सेवक जी जहां कहीं भी जाते थे वहां पर अणुव्रत की चर्चा करते रहते थे दौलतगढ़ सेवक जी की जन्मभूमि थी और तेरापंथ सभा भवन उनका एक आश्रय स्थल था साधु संतों की सेवा करना वह समाज के प्रत्येक व्यक्ति के साथ के अंदर ...

तपस्या पारणा कैसे करें ?

*बहुत कठिन है मार्ग तप का - 112*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸    🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻          📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕                      🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                                 🌹श्रृंखला 112 🌹      श्रावक शिव लाल जी अपने आवास पर आराम से बैठे हुए थे। उस समय राजनगर बड़ेपाडे का एक व्यक्ति शिव लाल जी के पास में आता है ,प्रणाम करता है और नम्र निवेदन करता है हमारे बड़े पाडे के अंदर बडोला परिवार आर्थिक दृष्टि से बहुत ज्यादा संपन्न है पर सेठ साहब उनके जीवन म...

*LIFE MANTRA *

                       *LIFE MANTRA * *विजेता से ऊपर भी कुछ होता है। Man of the Match का तमगा सबको नहीं मिलता। कुछ Special Perform करने वालो को अचानक ये Fame मिल जाता है। बस आपके भीतर Spirit होना चाहिये। Life के Match में जितनी बार आप Man of the Match होते है ये आपका Spirit ही होता है जो आपको इस मुकाम तक ले जाता है। अच्छे दिनों को कमाने के लिये हमेशा बुरे दिनों से लड़ना होता है और जिस दिन ये जंग खत्म हुई, हम भले ही इस जंग में सिपाही थे मगर जंग की जय हो के बीच हम ही यहां के बेताज बादशाह होते है। हारने और जीतने वाले के न चहरे पर कुछ लिखा होता है न किस्मत में। बस ये उनकी सोच उनका जुनून होता है जो उन्हें बार बार हर बांज की तरह अपनी Destiny पर आंखे गड़ाकर पुरी दुनिया से आपकी जीत छिन लेने की प्रेरणा देता है। और ये सिर्फ उनसे हो सकता है जो जानते है कि वो खुद से प्यार करते है। Important ये नहीं कि आप किस मैदान में कौनसा Match खेल रहे है। Important यह है कि उस मैदान को अपने हुनर से फतेह करने की जिद्द और सब्र दोनों होने चाहिये।* ⚜⚜⚜...

*बहुत कठिन मार्ग है तप का -111*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸      🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻                             📕 *बहुत कठिन मार्ग है तप का*📕                        🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                                   🌹श्रृंखला 111 🌹      कडेचाका गुडा श्रावक शिव लाल जी बडोला अपने परिवार का लालन पालन कर रहे थे ।पर साधु-साध्वियों आवागमन कम होने के कारण संस्कारों की गहराई आनी चाहिए थी वह परिवार के अंदर नहीं...

*अणुव्रत पथ के पथिक*

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                   U🌹*चिंतन लेखमाला*🌹       🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺*दलितों  के अंदर कार्य करने वाला कार्यकर्ता देवीलाल बेरवा*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻              ⭐ता-23/8/2018 ⭐                ⭐वार -गुरुवार⭐                 🌹  शृखला  9 🌹 दलितों के अंदर कार्य करने वाला कार्यकर्ता देवीलाल बेरवा मुनि भूपेंद्र कुमार मेवाड़ के अंदर जब आचार्य तुलसी का आगमन होता है उस समय आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन को जन व्यापी बनाने के लिए अनेक प्रकार के उपक्रमों को अपने हाथ में लिया उन उपक्रमों में एक उपक्रम था बेरवा समाज के अंदर एक क्रांति का सूत्रपात करना मेवाड़ के अंदर पूर गांव का एक नवयुवक देवीलाल बेरवा वह सामने आता है और यह संकल्प करता है मैं बेरवा समाज को बेसन मुक्...

संयुक्त परिवार के लाभ

* आत्मरक्षा का सूत्र हे रक्षाबंधन*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸      🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉।                           🌻🌻   * आत्मरक्षा का सूत्र हे रक्षाबंधन*🍁 🍁🍁🙌🙌                                                   🙏🙏🙏🙏🙏                                                  ता26/8/2018                   वार🌞 रविवार       आत्मरक्षा का सूत्र है रक्षाबंधन हर व्यक्ति के मन के अंदर हर समय सुरक्षा की भावना कायम रहती है कोई भी व्यक्ति अपने आप को असुरक्षित रखना पसंद नहीं करता है आत्मरक्षा का महत्वपूर्ण सूत्र है रक्षाबंधन जब रक्षाबंधन का पर्व आता है तब मन के अंदर एक न...

बहुत ही सुन्दर विचार

*LIFE MANTRA*

                             *LIFE MANTRA* *दुनियाभर में हजारों भाषाएं है : American, British, Chinese, Japanese, Kannad, Telugu, Gujrati, Marathi, Nepali, Rajasthani, Arabic, French, etc., Etc.,.... शायद इतनी सारी भाषाओं को सीखने और समझने में पूरी उम्र गुजर जाये। मगर एक Language है जो हर जगह Work करती है.... प्यार की, प्रेम की भाषा... दुनिया के किसी कोने में चल जाये... नन्हे-मुन्ने बच्चे, Youth हो या बुजुर्ग... एक Smile और मन में उमड़ता स्नेह सिर्फ दो सेकेंड में बिन कहे सब कुछ कह जाता है। इस भाषा को शब्दों का शामियाना ओढ़ाने की जरूरत नहीं होती... दिल से कही जाती है और दिल तक पहुंच जाती है। जिनके जुबान नहीं होते... बोलते वो भी तो है... और समझ में भी आ जाती है। वो कहते है ना दिल की बातें दिल ही जाने। यह एक एसा Science है जो पुरी दुनिया को Hypnotise कर लेता है, कुछ ना कहो.... कुछ भी ना कहो... फिर भी समझ मे आ जाता है कि कहना क्या चाहते है।* *कुछ चीज़ें और कुछ बातें दुनिया के दायरों से परे होते है... जहा दिमाग नह...

17 वर्षीय शिवांगी पाठक

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸      🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉।                                      *चिंतन लेखमाला* 🌹*लेखक- मुनिश्री भूपेन्द्र कुमारजी*🌹    🌻🌻   * 17 वर्षीय शिवांगी पाठक ने सबसे ऊँचीचोटी माउंट किलिमँजारो को फतेह करके नया इतिहास बनाया*🍁 🍁🍁🙌🙌                                                   🙏🙏🙏🙏🙏                                                  ता24/8/2018                   वार🌞 शुक्रवार               🌹श्रृंखला-645🌹 17 वर्षीय शिवांगी पाठक ने सबसे ...

कठिन है मार्ग तप का

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸      🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻              📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕                        🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                                   🌹श्रृंखला 110 🌹    आचार्य भिक्षु का मेवाड़ के अंदर छोटे-छोटे गांव में विचरण होता रहा और उन गांव में सहजता सरलता और समर्पण लोगों के दिलों, दिमाग के अंदर भरि हुई थी  ।सुलभ बोधि होने के कारण अनेकों व्यक्ति तेरापंथ के तत्वों को समझकर तेरापंथ की श्र...

*अनुशासनप्रिय अणुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत*☘

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                     🌹*चिंतन लेखमाला*🌹         🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺*अनुशासनप्रिय अणुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻              ⭐ता-24/8/2018 ⭐                ⭐वार -शुक्रवार⭐                 🌹  शृखला  9🌹अनुशासनप्रिय अनुव्रती मूल सिंह जी चुंडावत मुनि भूपेंद्र कुमार जो व्यक्ति अनुशासन के हथियार को अपने हाथ में रखकर आगे बढ़ता है वह व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी असफल नहीं होता सफलता उसका इंतजार करती रहती है ऐसे ही एक अनुशासनप्रिय व्यक्तित्व भीलवाड़ा जिले के अंतिम गांव थाना के अंदर उभर कर आया मूल सिंह जी चुंडावत जिन्होंने अपने जीवन के अंदर अनुशासन को ही सब कुछ माना एक अनुशासन ने उनको शिखरों पर चढ़ा दिया था विद्या भूमि राणावास जहां का...

तत्त्व ज्ञान 11

*📒📕     तत्व ज्ञान -【01】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿            *▪पहला बोल - गति चार ▪* *हमने जाना कि लोक का निचला भाग अधोलोक कहलाता है। इस अधोलोक में सात पृथ्वियां है जो नरक कहलाती है। जिनके नाम है- धर्मा, वंशा, शैला, अञ्जना, रिष्टा, मघा और माघवती। रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, बालुकाप्रभा, पंकप्रभा, धुमप्रभा, तमःप्रभा और महातमःप्रभा इनके गौत्र है।* *नरक भूमियों के नाम और गौत्र में अंतर है। नाम अनादिकालसिद्ध होता है और अन्वयरहित होता है। अर्थात् नाम में उसके अनुरूप गुण होना आवश्यक नहीं है, जबकि गौत्र गुणप्रधान होता है। नाम की अपेक्षा गौत्र की प्रधानता है। नरक भूमियों के गौत्र अर्थानुसार है, अतएव उनके अर्थ से स्पष्ट है कि-* *1. रत्नप्रभा - पहली भूमि रत्नप्रधान होने से रत्नप्रभा कहलाती है। यह काले रंग के भयंकर रत्नों से व्याप्त है।* *2. शर्कराप्रभा - दूसरी भूमि शर्करा (कंकड़) के सदृश होने से शर्कराप्रभा है। यहां की धरती भाले, बर्छी आदि से भी अधिक तीक्ष्ण कंकरों से व्याप्त है।* *3. बालुकाप्रभा - तीसरी बालुका (रेती) की मुख्यता होने से ...

तत्त्व ज्ञान 10

*📒📕     तत्व ज्ञान -【10】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿            *▪पहला बोल - गति चार ▪* *सापेक्षवाद के आविष्कर्ता प्रो. आइन्स्टीन ने लोक का व्यास एक करोड़ अस्सी लाख प्रकाशवर्ष माना है। 'एक प्रकाशवर्ष उस दुरी को कहते हैं जो प्रकाश की किरण 1,86,000 मील प्रति सैकण्ड के हिसाब से एक वर्ष में तय करती है।'* *भगवान महावीर ने देवताओं की 'शीघ्र गति' की कल्पना से लोक की मोटाई को समझाया है। जैसे- छह देवता लोक का अन्त लेने के लिए 'शीघ्र गति' से छहों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ऊँची और नीची) में चले। ठीक उसी समय एक सेठ के घर में एक हजार वर्ष की आयु वाला एक पुत्र जन्मा...उसकी आयु समाप्त हो गयी। उसके बाद हजार वर्ष की आयु वाले उसके बेटे-पोते हुए। इस प्रकार सात पीढियां बीत गई। उनके नाम- गौत्र भी मिट गए, तब तक वे देवता चलते रहे, फिर भी लोक के अन्त तक नहीं पहुंचे। हाँ, वे चलते- चलते अधिक भाग पार कर गए। बाकी रहा वह भाग कम है- वे चले उसका असंख्यातवां भाग बाकी रहा है। जितना भाग चलना बाकी रहा है उससे असंख्यात गुणा भाग पार कर चुके हैं। यह लोक इतना...

तत्त्व ज्ञान 09

*📒📕     तत्व ज्ञान -【09】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿            *▪पहला बोल - गति चार ▪* *कल हमने समझा था कि जैसे कोई पुरुष अपने दोनों पैरो को फैलाकर और दोनों हाथों को कमर पर रखकर खड़ा हो, उसका जैसा आकार होता है ठीक इसी प्रकार का लोक का आकार है। कमर के नीचे के भाग को अधो-लोक, ऊपर के भाग को ऊर्ध्वलोक और कटि-स्थानीय भाग को मध्य लोक कहते हैं। तो इस तरह जैन दर्शन के अनुसार 'लोक' तीन भाग में विभाजित है-* *1. ऊर्ध्व लोक* *2. मध्य लोक* *3. अधोलोक* *इस तीन विभाग वाले लोक को लोकाकाश कहा जाता है, क्योंकि इसके भीतर ही  जीव- पुद्गलादि सभी चेतन और अचेतन द्रव्य पाये जाते हैं।* *लोकाकाश की ऊंचाई 14 रज्जु है। यह अधोलोक में सबसे नीचे अर्थात तल भाग में 7 रज्जु चौड़ा है। उस से ऊपर अनुक्रम से कम होता हुआ 7 रज्जु ऊपर आ जाने पर 1 रज्जु बराबर चौड़ा रहता है। तत्पश्चात ऊपर चौड़ा होता हुआ जब 3 1/2 रज्जु ऊपर उठे तब 5 रज्जु चौड़ा होता है। उसके बाद ऊपर कम होता हुआ क्रमशः 3 1/2 रज्जु पर अंत में 1 रज्जु चौड़ा रहता है। इस प्रकार संपूर्ण लोक नीचे से ऊपर तक चौदह ...

तत्त्व ज्ञान 08

*📒📕     तत्व ज्ञान -【08】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿            *▪पहला बोल - गति चार ▪* *पिछली कड़ी में हमने पढ़ा कि संसारी जीव की भवस्थितियां चार है। जिन्हें चार गति कहते है- नरक गति, तिर्यञ्च गति, मनुष्य गति और देव गति।* *नरक गति-- वह स्थान, जहां जीव प्रकृष्ट पापजन्य दुःखों का वेदन करते है, वह नरक कहलाता है। इनमें जो जीव उत्पन्न होते हैं, वो नारक कहलाते है। या हम यों भी कह सकते हैं, जहाँ सद्भाग्य- विकल जीव उत्पन्न होते हैं और जहाँ सदवेदना का अभाव है, उन स्थानों को निरय या नरक कहा जाता है और वहां उत्पन्न होने वाले जीव नैरकीय कहलाते हैं। वे जीव नैरकीय आयुष्य से बंधे हुए वहां रहते हैं।* *चार गतियों में से मनुष्य गति और तिर्यञ्च गति तो हमारे सामने हैं, किन्तु देव गति याने स्वर्ग और नरक गति याने नरक हमारे प्रत्यक्ष नहीं है। तब यह जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि आखिर यह स्वर्ग और नरक है कहाँ ! जैन मान्यतानुसार इन चार गति के जीवों का समावेश लोक में होता है। अब प्रश्न यह उठता है कि लोक क्या है?* *इस अनन्त आकाश में प्रतिदिन होने वाले चन्द्र...

तत्त्व ज्ञान 07

 *📒📕     तत्व ज्ञान -【07】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿            *▪पहला बोल - गति चार ▪* *यदि हम अपने चारों ओर देखते हैं, तो हमें न केवल पुरुष, महिलायें, लड़के, लड़कियां दिखाई देखते हैं, बल्कि बिल्लियां, कुत्ते, पक्षी, कीड़े, मकोड़े, पौधे आदि भी दिखाई देते हैं। यह देखा जा सकता है कि इस ब्रह्मांड में जीव के विभिन्न रूप हैं।* *किन्तु कुछ भी स्थायी नहीं है। हर सेकंड कोई मरता है तो कोई जन्म लेता है। जब कोई मरता है तो यह जिज्ञासा उत्पन्न हो सकती है कि मरने वालों के साथ क्या होता है, और कौन तय करता है कि वह किस रूप में पैदा होना चाहिए। कर्म सिद्धांत पर आधारित बहुत ही सरल और ठोस तार्किक तरीके से जैन दर्शन हमें यह बताता है कि आत्मा अमर है। जन्म और मरण से आत्मा का अस्तित्व नहीं मिटता। आत्मा से जुड़े कर्मों के कारण जीव का जन्म और मृत्यु का चक्र अनवरत जारी रहता है। वे इस संसार में भटकते रहते है। जब तक आत्मा अपने कर्मों से छुटकारा नहीं पा लेती तब तक वे अलग अलग रूप में जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त नहीं हो सकते।* *तो जो संसारी जीव है, जिनक...

तत्त्व ज्ञान 06

*📒📕     तत्व ज्ञान -【06】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *अभी तक हमने पढ़ा कि जीवों के मुख्य रूप से दो भेद किये गए हैं- सिद्ध जीव और संसारी जीव। जीवों का दूसरा विभाग है- संसारी। 'संसरति इति संसारी' जो संसरण करता है, एक जन्म के बाद दूसरा जन्म ग्रहण करता है, वह संसारी जीव कहलाता है।* *प्रश्न उठता है- जीव जन्म-मरण क्यों करता है ? दशवैकालिक सूत्र में कहा गया है- आत्मा के भीतर जब तक क्रोध, मान, माया और लोभ रहते हैं, वे आत्मा को आगे जाने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही कषाय समाप्त हो जाते हैं, आत्मा मुक्त हो जाती है और हमेशा के लिए परमात्मा के रूप में अवस्थित हो जाती है।* *आत्मा शाश्वत है। वह कभी समाप्त नहीं होती है। उसका अस्तित्व हमेशा रहता है। वह शरीर का परिवर्तन करती रहती है। गीता में कहा गया है-* *वासांसि जीर्णानि यथा विहाय,* *नवानि गह्वाती नरोस्पराणि।* *तथा शरीराणि विहाय जीर्णा* *न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।* *जैसे आदमी पुराने वस्त्रों को छोड़कर नए वस्त्रों को धारण कर लेता है, उसी प्रकार आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरा शरीर धारण कर लेती है। वह कभी नष्ट नहीं होत...

तत्त्व ज्ञान 05

*📒📕     तत्व ज्ञान -【05】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *कल हमने पढ़ा की सिद्धावस्था आत्मा की शुद्धावस्था है। प्रश्न हो सकता है कि आत्मा शाश्वत है तो  क्या उसे देखा जा सकता है? तत्वविद्या में कहा गया है- आत्मा अमूर्त है। वह न लाल है, न काली है, न पीली है, न सफेद है, न हरी है। उसका न कोई रंग है न कोई रूप।* *एक महात्माजी किसी गांव में गए। अनेक शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर 'आत्मा' पर लम्बा वक्तव्य दिया। एक युवक, जो अपने आप को बौद्धिक मानता था, बोला- महात्मन ! आपने प्रवचन दिया, बड़ा श्रम किया, इसके लिए आपके प्रति हम आभार ज्ञापित करते हैं। किन्तु बाबाजी ! इतना सुनने के बाद भी आत्मा के अस्तित्व में मेरा कोई विश्वास नहीं है। मैं नास्तिक दर्शन चार्वाक को मानता हूँ। जिसका सिद्धान्त है-* *यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, तावत् वैषयिकं सुखम्।* *भस्मीभूतस्य देहस्य, पुनरागमन कुतः?।।* *जब तक जीओ, सुख से जीओ। वैषयिक सुखों का भोग करो। क्योंकि शरीर के नष्ट हो जाने के बाद पुनर्जन्म जैसा कुछ भी नहीं है। जो कुछ है, इसी जीवन में है। फिर भी मेरा आग्रह नहीं है। यदि आप मुझे आत्मा को हाथ ...

तत्त्व ज्ञान 04

*📒📕     तत्व ज्ञान -【04】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *कल हमने पढ़ा था कि नौ तत्वों में पहला तत्व है- जीव। जीवों के मुख्य रूप से दो भेद किये गए हैं- सिद्ध जीव और संसारी जीव। सिद्ध जीव वे होते हैं, जो जन्म- मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष में अवस्थित हो जाते हैं। जिनके न शरीर है, न वाणी है और न ही मन है। वे अशरीर, अवाक् और अमन होते हैं। परम आनन्दमय, ज्ञानमय और शक्तिमय होते हैं। दूसरी भाषा में कहें तो जो आत्माएं कर्म-रज को धो-मांजकर पूर्णरूपेण उज्ज्वल बन जाती है, उन्हें सिद्ध कहते हैं।* *सिद्ध वो हैं जिन्हें हम नमस्कार महामन्त्र के दूसरे पद "णमो सिद्धाणं" में नमस्कार करते हैं। सिद्धावस्था आत्मा की शुद्धावस्था है। वहां केवल जीव का ही अस्तित्व है। अनादिकाल से आत्मा के साथ चिपके हुए कर्म पुद्गल उस स्थिति में टूटकर अलग हो जाते हैं। वहां केवल आत्मा की ज्ञान-दर्शनमयी सत्ता का अस्तित्त्व है। उस अस्तित्त्व की पहचान परमात्मा, मुक्तात्मा, सिद्ध, परमेश्वर, ईश्वर आदि अनेक नामों से की जा सकती है।* *यहां हम एक और बात अच्छी तरह से समझ लें कि जैन दर्शन अवतारवाद को स्वीकार नहीं कर...

तत्त्व ज्ञान 03

*📒📕     तत्व ज्ञान -【03】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *जैन दर्शन में नव तत्व माने गए हैं। आचार्य उमा स्वाति, जो जैन परम्परा के महान आचार्य हुए हैं, ने तत्वार्थ सूत्र में सात तत्वों का उल्लेख भी किया है। सात और नव की संख्यां में कोई खास अंतर नहीं है। पूण्य और पाप को अलग से न गिना जाये तो नौ हो जाते हैं और अलग गिनती करने पर सात रह जाते हैं, यह विवक्षा है।* *दुनिया में मूल तत्व दो हैं- जीव और अजीव। इन दो के विस्तार से सात बन सकते हैं, नौ बन सकते हैं और सैंकड़ों भी बनाये जा सकते हैं।* *नौ तत्वों में जीव, अजीव, पूण्य, पाप, आश्रव, संवर, निर्जरा, बंध और मोक्ष हैं। इनमें चार युगल है। ये युगल भी ऐसे जो एक- दूसरे के विपरीत हैं। जीव से विपरीत अजीव, पूण्य से विपरीत पाप, आश्रव से विपरीत संवर और बंध से विपरीत मोक्ष। अर्थात ये सब विरोधी स्वभाव वाले हैं।* *नौ तत्वों में पहला तत्व है- जीव। 'चैतन्यलक्षणों जीवः' जिसमे चैतन्य है, जानने की प्रवृति है, अनुभूति की क्षमता है, वह जीव है। इस दुनिया में एक-दो-तीन नहीं अनंत-अनंत जीव है।* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ 🔘🔘🔘🔘🔘🔘🔘🔘🔘🔘🔘 🔘🔘 🔘🔘 ?...

तत्त्व ज्ञान

*📒📕     तत्व ज्ञान -【02】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *भगवान महावीर ने कहा -* *जो जीवे वि न याणाइ, अजीवे वि न याणइ।* *जीवाजीवे अयाणंतो, कहं सो नाहिइ संजमं।।* *जो जीव को नहीं जानता, अजीव को नही जानता, जीव और अजीव को नही जानता, वह संयम को कैसे जान सकता है? इसलिए अहिंसक मनुष्य के लिए, अहिंसा की साधना में जीव व अजीव का ज्ञान होना अनिवार्य है।* *इसका यद्यपि आगम शास्त्रों में विशद विवेचन किया गया है। परन्तु आगम शास्त्रों को सही रूप में पढ़ लेना, उनके अर्थ एवं मर्म को हृदयंगम कर लेना हम जैसे सामान्य लोगों के लिए कठिन होता है। अतः संग्रहकर्ता ने आगम के सारांश रूप में सरल भाषा में थोकड़ों का निर्माण किया है। इसमें पच्चीस-बोल पच्चीस वाक्यों का समुदाय है। इसमें जीव- अजीव का विश्लेषण सरल व वैज्ञानिक ढंग से किया है।* *यह जैन धर्म को समझने का प्रवेश द्वार भी कहलाता है। जिस प्रकार अंग्रेजी भाषा को पढ़ने- लिखने के लिए ए, बी, सी, डी आदि का ज्ञान पहले अनिवार्य होता है। गणित सिखने के लिए अंको का ज्ञान तथा जोड़, बाकी, गुणा व भाग का ज्ञान अनिवार्य होता है ठीक उसी प्रकार जैन धर्म की...

तत्त्व ज्ञान

*📒📕     तत्व ज्ञान -【01】    📗📘* ➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿➿ *इस विराट संसार में प्रत्येक प्राणी सुख चाहता है। चाहता ही नहीं वरन्, सुख-प्राप्ति के लिए दिन-रात मेहनत भी करता है परन्तु फिर भी उसे सच्चा व स्थायी सुख प्राप्त नहीं हो पाता। क्यों ?* *अगर इस प्रश्न पर चिंतन करें तो निष्कर्ष यह निकलता है कि अज्ञान और मोह के कारण प्राणी इन्द्रिय विषयों में प्राप्त क्षणिक रागात्मक सुखाभास को ही सच्चा सुख मानने लग जाता है। तथा उन्ही-उन्ही विषयों की प्राप्ति में दौड़ लगाता रहता है। परिणाम स्वरूप उसे आत्मिक सुख की अनुभूति हो ही नहीं पाती।* *अब प्रश्न यह उठता है की आत्मिक सुख की प्राप्ति कैसे हो ? आत्मिक सुख की प्राप्ति हेतु तत्वज्ञान एवं सिद्धान्त बोध होना आवश्यक है क्योंकि बिना तत्व ज्ञान एवं सिद्धान्त बोध के दृढ श्रद्धान नहीं हो पाता तथा बिना दृढ श्रद्धान के आचरण सम्यक नहीं बन पाता है।* *पढमं नाणं तओ दया - जैन दर्शन का यह समन्वयात्मक सिद्धान्त है। ज्ञान के बिना आचरण शक्य नहीं और आचरण के बिना ज्ञान की सार्थकता नहीं है। इसलिए ज्ञान और आचरण का समन्वय आवश्यक है।* *आध्यात्मिक क्षे...

*LIFE MANTRA *

*LIFE MANTRA * *बड़ी तेजी से Free का Trend हमारी जिंदगी में घुसपैठ कर रहा है। जहां भी कुछ _" मुफ्त में मिल रहा है "_ सुनाई दिया.... कदम उसी ओर चल पड़े.... फ्री ऑफ फण्ड Tour, Free of Fund खाना.... Free Movie.... etc., etc., ये जो Habbit बना ली है हमने मुफ्तखोरी की... किसी न किसी रूप में हमें और हमारी आने वाली Generation की Immunity Power छिन रही है। कुछ अजीब नहीं है ये कि जहा Purse खाली हो रही हो वहां Priority देने के बजाय हम वहा जाना पसंद करते है जहां खाना Free... रहना Free... Tourism Free... एक यही Mentality है जिसकी वजह से सब कुछ Imbalance हो रहा है... Society की तरफ नज़र उठे तो कही यात्रा पर जाने की बात हो 1000 Rupees Bus की Ticket हो तो... बरबस कह देते है हम - ना बाबा ना 1000 कौन देगा ? वैसे भी अभी घर मे इतना काम है। और Organiser ने Sponsor ढूंढ लिये। पता लगा कि Bus Free में जा रही है तो बस 1000 Rs में जिस बस में मुश्किल से 10 लोग हुए थे... Free होते ही अब बैठने की लिये भी जगह नहीं है।* *रोज रोज के Free Fund का Funda कुछ पल की Deliciousness हो सकता है मगर आगे - बीमारिय...

* स्वावलंम्बन का पाठ पढ़ाया लिटिल जान ने*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸    🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉।                                      *चिंतन लेखमाला* 🌹*लेखक- मुनिश्री भूपेन्द्र कुमारजी*🌹    🌻🌻   * स्वावलंम्बन का पाठ पढ़ाया लिटिल जान ने*🍁 🍁🍁🙌🙌                                                   🙏🙏🙏🙏🙏                                              ता22/8/2018                   वार🌞 बुधवार               🌹श्रृंखला-642🌹 स्वावलंबन का पाठ पढ़ाया लिटिल जानने जब व्यक्ति अपने पुरुषार्थ के ऊपर भरोसा करता है तब वह औरों के लिए प्...

*बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸    🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻              📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕                      🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                                 🌹श्रृंखला 108 🌹    आचार्य भिक्षु का वह ऐतिहासिक चातुर्मास एक तरह से पूरे मेवाड़ के लिए वरदान बन जाता है ।किया हुआ बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता है ।यह कहावत भी सही चरितार्थ हो जाती है।     आचार्य भिक्षु का पुरुषार्थ व ज्ञान का प्रयोग  हर व्यक्ति के मन के अ...

*बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया

🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐 🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸    🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉 🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹     🌻 *गाथा तपोवल*3  🌻              📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕                      🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया*  🍁🍁 🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार  जी।🙌                                            🙏🙏🙏🙏🙏                                 🌹श्रृंखला 109 🌹    राजनगर महाराजा राजसिंह जी द्वारा बसायाहुआ नगर और वहां के बड़े-बड़े परिवार आचार्य भिक्षु के कारबे के साथ  जुड़ने प्रारंभ हो जाते हैं। वहां का भामाशाह कावड़िया परिवार ,कर्णावत परिवार ,चपलोत परिवार, मेहता परिवार, बडोला परिवार, लोड़ा परिवार आदि अनेको...

*दलितों के अंदर कार्य करने वाला कार्यकर्ता देवीलाल बेरवा*

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                     🌹*चिंतन लेखमाला*🌹         🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺*दलितों  के अंदर कार्य करने वाला कार्यकर्ता देवीलाल बेरवा*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻              ⭐ता-23/8/2018 ⭐                ⭐वार -गुरुवार⭐                 🌹  शृखला  9 🌹 दलितों के अंदर कार्य करने वाला कार्यकर्ता देवीलाल बेरवा मुनि भूपेंद्र कुमार मेवाड़ के अंदर जब आचार्य तुलसी का आगमन होता है उस समय आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन को जन व्यापी बनाने के लिए अनेक प्रकार के उपक्रमों को अपने हाथ में लिया उन उपक्रमों में एक उपक्रम था बेरवा समाज के अंदर एक क्रांति का सूत्रपात करना मेवाड़ के अंदर पूर गांव का एक नवयुवक देवीलाल बेरवा वह सामने आता है और यह संकल्प करता है मैं बेरवा समाज...

*व्यसनमुक्त अणुवर्ती महेंद्र सिंह रावत*

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 🌸ॐ भिक्षु🕉जय भिक्षु🌸 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉                     🌹*चिंतन लेखमाला*🌹         🇮🇳 *अणुव्रत पथ के पथिक*🇮🇳 🌹*लेख़क:-मुनि भूपेन्द्र कुमार जी🌹 🌺🌺 *व्यसनमुक्त अणुवर्ती महेंद्र सिंह रावत*☘🌙 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻                         🌹  शृखला - 8 🌹व्यसनमुक्त अनुवर्ती महेंद्र सिंह रावत मुनि भूपेंद्र कुमार कौन सी प्रेरणा कब काम कर जाए इसका पता नहीं लगता है और जब वह प्रेरणा काम करती है तब जीवन के अंदर एक नया बदलाव अपने आप सामने आने लग जाता है परिवर्तन जीवन में अवश्य ही आता है पर कौन से समय पर आता है यह किसी को पता नहीं लगता है कुकर खेड़ा गांव के अंदर महेंद्र सिंह रावत जो एक अध्यापक का कार्य कर रहा था वह स्वयं व्यसन युक्त था और उसके पिताजी मोती सिंह जी रावत जो सेना के अंदर थे पर शराब के व्यसन से उन्होंने अपने पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था उन्हीं के पदचिन्हों पर उनका सुपुत्र महेंद्र सि...

Good Morning

☀🌾🌾🌿☀🌾🌿🌿☀ *🦋केवल पैसों से आदमी धनवान नहीं होता* *असली धनवान वो है जिसके पास*                *अच्छी सोच*              *अच्छे दोस्त और*                *अच्छे विचार* *सुबह की बधाई का मतलब सिर्फ़ किसी को गुड मॉर्निंग शुभ प्रभात कहना नहीं होता बल्कि इसके पीछे एक संदेश होता है ,की जब मैंने आँखे खोली तो मुझे आप याद थे।🦋*          🌷🌿🌿🌸🌻🌻🌻            *🥀Good morning🥀*

भारत बन सकता है विश्व का दूसरा देश

LIFE MANTRA

*LIFE MANTRA :* *किसी ने पुछा - Life क्या है, मेरा Reply था - Continuity, Regularity, जो कुछ भी निरंतर हो लगातार हो... वही Life है। निरंतरता टूटी.... कि सब कुछ ठहर गया.... जो भी चल रहा था, उस पर Full Stop लग जाता है। चलते रहे तो मंजिल की दुरिया सिमट जाती है। लक्ष्य करीब आ जाता है। जरा सी देर रुके पुरी दुनिया कायनात आपको पिछे छोड़कर आगे निकल जाती है। वो जुमला है ना " रसरी आत जात के सील पे होत निशान " मत कहो कि हम पत्थर पर लकीरे नहीं खींच सकते... इस जगत में कुछ भी एसा नहीं है जो हो नहीं सकता बशर्ते आपकी कोशिशें थक नहीं जाये। कही भी.... जहां Irregularity है... Job, Business,  Family, Society.... एक दिन एक मोड़ वो आता है जब हम सब कुछ अपनी आंखों के सामने खोने के लिये मजबुर हो जाते है। और यह Life का Fact है। जिंदगी सिर्फ चलते रहने का नाम है। कोइ साथ दे ना दे, कोइ Support करे ना करे, कोइ साथ चले ना चले... बस अपनी धुन में बिन थके.. बिन रुके.. बिन ठहरे... निरंतर चलते रहे... चरैवेती-चरैवेती का Commitment लिये हुए।* *ठहरते वो है जिनके इरादे कमजोर हो... अपने इरादों को उंचा आसमान दिज...

LIFE MANTRA

*LIFE MANTRA* *आप सबकी नजर में Perfect नहीं हो सकते, कभी नहीं। तो क्या फर्क पड़ता है कि कुछ लोग आपको पसंद नहीं करते। किसी को आपकी खूबसूरती पसंद नहीं तो किसी को आपकी बदसूरती। किसी को आपकी आदतें पसंद नहीं तो किसी को आपकी बातें। अलग-अलग लोग, अलग Views... तो कब तक आप औरो के हिसाब से खुद को बदलते रहेंगे। कब तक जो दुसरे आपके बारे में सोचते है उस सोच में ढलते रहेंगे या जो वो आपको बनाना चाहते है वो mआप बनते रहेंगे। अगर आपका दिल कहता है कि All is Well तो Let the World Go to Hell.... हमें दुनिया से क्या... क्यों सुने दुनिया की... जिसे कहना है वो कहते रहे जो सही है वो हम करते रहेंगे। ये सिर्फ बवंडर होते है, Rumours होते है... जिसका सिरा पकड़कर लोग आपके बारे में गलत Images बना लेते है - जो सोचना है जिसे सोचने दे। जो कहना है कहने दे। सोचना और कहना तो भगवान के लिये भी किसी ने बंद नहीं किया तो हम और आप किस बाग के बथुए है, कुछ तो लोग कहेंगे। लोगो का काम है कहना। अपने इरादों को सच करते जाये, वही लोग जो आपके खिलाफ खड़े है एक दिन जरूर कहेंगे... Sir... मैं आपका बहुत बड़ा Fan हु। खुद की नजर में Perfect रह...

🔮🔮" *मुक्तक माला*"📿📿📿

         🔮🔮" *मुक्तक माला*"📿📿📿     🙏🙏विषय :"   हे प्रभो ! यह तेरापंथ  🙏🙏।।       हे प्रभो ! यह तेरापंथ हम सबको प्यारा है ।  भूले भटके राहगिरों का सचमुच उजियारा🌞 है ।   आत्म - शांति 👤की खोज में भटकते इन्शान को , तेरापंथ कल्पतरु सच्चा सहारा है ।। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

*मुक्तक माला*

         🔮🔮" *मुक्तक माला*"📿📿📿     〽〽विषय :"  नही ❌ मिलता " 〽〽        रोने से 😭 कभी राज्य 🏘 नही मिलता ।      सोने से 🙇🏻‍♀ कभी ताज 👑 नही मिलता ।     खून का पसीना 😰 बहाये बिगर , दोस्तो     चमन  🌾🌾बनाने का राज नही मिलता ।। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

*LIFE MANTRA*

📕📗📘📙📕📗📘📕📗 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 *LIFE MANTRA*       *अगर आपने सोचा ह तो वो कर भी जायेंगे हम जो भी हासिल करते है वो कभी न कभी,, कही न कही हमारी सोची समझी planning का execution है, implimentation है। आप जो भी सोचे वो बन जाते है,, आप जो भी सोचे वो पा लेते है। अच्छा - बुरा possitive- negative,, life में जिस किसी situation से हम face to face,,,,, face करते है वह हमारे से उभरे विचारो का उधेड़बुन  ही है।*       *हमारी पूरी दुनिया ,, हमारी कल्पना,, हमारी imagination है। उस planning की तरह जो उकेरा तो कैनवास पर जा रहा है,, लेकिन plan सिर्फ min में हो रहा है।*        *जिंदगी के किसी भी road से गुज़र जाये,,कोई  road ऐसा नही मिलेगा जिस पर challanges न हो,, चुनोतियाँ न हो। अगर ज़िन्दगी ह तो चुनोतियाँ भी होगी,, और हर एक चुनोतियो के चट्टानों को तोड़ने का सिर्फ एक equipment है,,,,, आपके thoughts,,, thoughts से ज्यादा powerfull हथियार और कुछ हो ही नही सकता। अपने चिंतन को अपनी मुश्किलो का हथियार बनाये या अपनी कमजोरी,,,,,, यह अगर क...

Kavita Atal bihari vajpeyi ko shradhanjali

🔮🔮" *मुक्तक माला*"📿📿📿

         🔮🔮" *मुक्तक माला*"📿📿📿     ⚡⚡विषय :" मूल्य "⚡⚡      कृपाण 🗡 का मूल्य है ,म्यान का नही ।     ज्ञान📚 का मूल्य है , शान का नही ।       भलाई के लिये जीने वालों  से  पूछो 🤷🏻‍♀🤷🏻‍♂    कुर्बान का मूल्य है ,जान का नही ।। 💥💥💥💥💥💥💥

*LIFE MANTRA

*LIFE MANTRA *        *क्यों झुके किसी के सामने,,,, जब हम wrong नही है। क्यूं compromise करे जब हम जो कर रहे है, वह किसी angle से गलत नही है।डर से आगे निकलकर देखे हमेशा खुद को सबसे best पायेंगे,,, ख़ौफ वो खाते है जो wrong हो।एक mistake आपको किसी से आँख मिलाने नही देती, जिंदगी भर पश्चाताप करते रहने की मजबुरी और घुटन के साथ जीने की वजह देती है अगर आप अच्छे है और सच्चे है तो जरुरत नही किसी के सामने घुटने टेकने की , झुकने की गनन्त करना अगर अन्याय है तो गलत को बर्दाश्त करना भी अन्याय है। जिंदगी की असली जंग यही है कि हम गलत को गलत और सही को सही  proof करने की हैसियत रखे। शायद कहने से ये proof हो न हो मगर जब अपने कर्तव्यों को उची उड़ान देते है तो वो एक उड़ान साबित कर देता है , की आप wrong नही थे , जो आपको गलत समझ रहे थे। और एक दिन इस सच को पूरी दुनिया डॉ से स्वीकार कर लेती हैं।* 💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎

*परिवार कैसे सुन्दर हो ?*

*परिवार कैसे सुन्दर हो ?* परिवार में तुच्छ स्वार्थ हावी न हो | जहां व्यक्ति केवल अपना हित देखता है, वहां परिवार के दुसरे सदस्य दूर हो सकते हैं | --- जिस परिवार में परस्पर हितैषिता का भाव होता है, तुच्छ स्वार्थ हावी नहीं होता, वह परिवार सुन्दर होता है |  *- परम श्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमणजी*

*स्वर्गतुल्य / नरकतुल्य परिवार*

*स्वर्गतुल्य / नरकतुल्य परिवार* परिवार सुन्दर भी हो सकता है और वह असुंदर, कष्टयुक्त भी हो सकता है | जिस परिवार में सहन करने की वृत्ति होती है, वह परिवार स्वर्गतुल्य हो सकता है | जिस परिवार में सहनशीलता नहीं होती, बात-बात में कलह होता है, मारपीट होती है, वह परिवार अशांतिमय बन सकता है, नरकतुल्य बन सकता है |  *- परमश्रद्धेय आचार्य श्री महाश्रमणजी*

दिल को छू जाने वाली कविता

दिल को छू जाने वाली कविता 🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯🎯 दे   गई   खुशियाँ  कई  आँखों  में  तो, कई    नयनों    में    पानी   भर   गई । बरसी     बारिश     इस    कदर    कि, चारो   ओर   पानी   पानी  कर  गई ।। कोई   सोया   ना   रात  भर  ख़ुशी  में, बारिश  मन  को  खुशहाल  कर  गई । तो  कोई  चिंतित था आज सोऊँ कहाँ, बारिश  ऐसा  हाल  बेहाल  कर गई ।। किसी  ने  बनाया महल सपनों का तो, किसी  का  बना आशियां उजाड़ गई । कोई तर गया बारिश के *"स्पर्श"* से तो, देखों  कइयों की किस्मत बिगाड़ गई । सृजन   का   प्रतिक  है  बारिश  मग़र , कभी  कभी  रौद्र  रूप  धर  जाती है । लाती   है   सदा  खुशियाँ  मग़र  कभी, विध...

*Life Mantra*

*Life Mantra*        *अगर एक पौधा है तो आप उम्मीद बो रहे है। FAMILY हो या SOCIETY.... जिसके सृजन में आयने अपने किरदार निभाये है तो यह आपका अपनी country के लिए एक ऐसा investment है जो सिर्फ आपको नही आपके बाद हज़ारों पीढ़ियों को long life output देगा। आपने जो भी बोया है वो कभी न कभी उगेगा जरूर। आज नही तो कल देश हमें एक अच्छे इंसान के तौर पर नही चुनता,,,, हम चुनते है एक अच्छे देश को।  life को जरा सा pause दिजीये और खुद से पूछिए की Family, society, country के development में आपका part आपका role क्या था क्या आप सिर्फ नारेबाजी और हल्लाबोल में intrested है या फिर अपनो के लिए,  समाज के लिए , अपने वतन के लिये कुछ कर जाने का जुनून ,,,, एक ज़िद्द अपने दिल मे रखते है। सिर्फ बाते बनाते रहेंगे- आपकी भी बाते बनेगी, कुछ करेंगे तो तारीफ मिलेगी , प्यार मिलेगा, शोहरत मिलेगी, इज्जत ,सम्मान सब कुछ मिलेगा,,,मगर कुछ  निवेश करने के शर्त में।*           *रोज़ देश के सीने पर अपनी सेवा के पौधे लगाए,,, और देश को आपसे उम्मीदे बंधने लगेगी जिससे देश को उम्...