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🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉
🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹
🌻 *गाथा तपोवल*3 🌻 📕 *बहुत कठिन मार्ग है तप का*📕
🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया* 🍁🍁
🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
🙏🙏🙏🙏🙏
🌹श्रृंखला 111 🌹
कडेचाका गुडा श्रावक शिव लाल जी बडोला अपने परिवार का लालन पालन कर रहे थे ।पर साधु-साध्वियों आवागमन कम होने के कारण संस्कारों की गहराई आनी चाहिए थी वह परिवार के अंदर नहीं आयी थी ।श्राविका उमेदा देवी फिर भी कोशिश करके अपने वात्सल्य के साथ परिवार को सुसंस्कारित बनाने का प्रयास कर रही थी। श्रावक शिव लाल जी के तीन पुत्र हुए बड़े लड़के का नाम जालम चंद उसके पश्चात चंपालाल वह चुन्नीलाल रखा गया । एक सुपुत्री थी जिसका नाम था भूरीबाई ।छोटा परिवार था आर्थिक दृष्टि से इतना परी संपन्न नहीं था ।जैसे-तैसे अपने परिवार का गुजारा आराम से चला रहे थे।
पुरुषार्थ उनके विकास का सबसे बड़ा हथियार था ।सुबह चार बजे से सायं काल दस बजे तक वह अपने पुरुषार्थ में लगे रहते थे। तब जाकर परिवार का भरण पोषण आराम से होने लगाता था।आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ नहीं थे पर विचारों की दृष्टि से परिपूर्ण थे।
विचारों में शालीनता का समावेश था,जिसके परिणाम स्वरुप पूरे गांव के अंदर सबके साथ में प्रेम से रहते थे ।प्रेम ने ही उनको पूरे गांव के अंदर आदरणीय वह सम्माननीय पद पर प्रतिष्ठित किया था।
श्रावक शिव लाल जी मन में विचार कर रहे थे अब मेरे को क्या करना चाहिए ? चिंतन का दौर उर्धवा गमन की दिशा की ओर प्रस्थान करने लगता है ।क्रमशः
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🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
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🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
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🌹श्रृंखला 111 🌹
कडेचाका गुडा श्रावक शिव लाल जी बडोला अपने परिवार का लालन पालन कर रहे थे ।पर साधु-साध्वियों आवागमन कम होने के कारण संस्कारों की गहराई आनी चाहिए थी वह परिवार के अंदर नहीं आयी थी ।श्राविका उमेदा देवी फिर भी कोशिश करके अपने वात्सल्य के साथ परिवार को सुसंस्कारित बनाने का प्रयास कर रही थी। श्रावक शिव लाल जी के तीन पुत्र हुए बड़े लड़के का नाम जालम चंद उसके पश्चात चंपालाल वह चुन्नीलाल रखा गया । एक सुपुत्री थी जिसका नाम था भूरीबाई ।छोटा परिवार था आर्थिक दृष्टि से इतना परी संपन्न नहीं था ।जैसे-तैसे अपने परिवार का गुजारा आराम से चला रहे थे।
पुरुषार्थ उनके विकास का सबसे बड़ा हथियार था ।सुबह चार बजे से सायं काल दस बजे तक वह अपने पुरुषार्थ में लगे रहते थे। तब जाकर परिवार का भरण पोषण आराम से होने लगाता था।आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ नहीं थे पर विचारों की दृष्टि से परिपूर्ण थे।
विचारों में शालीनता का समावेश था,जिसके परिणाम स्वरुप पूरे गांव के अंदर सबके साथ में प्रेम से रहते थे ।प्रेम ने ही उनको पूरे गांव के अंदर आदरणीय वह सम्माननीय पद पर प्रतिष्ठित किया था।
श्रावक शिव लाल जी मन में विचार कर रहे थे अब मेरे को क्या करना चाहिए ? चिंतन का दौर उर्धवा गमन की दिशा की ओर प्रस्थान करने लगता है ।क्रमशः
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