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* स्वावलंम्बन का पाठ पढ़ाया लिटिल जान ने*

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🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸
 
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      *चिंतन लेखमाला*


🌹*लेखक- मुनिश्री भूपेन्द्र कुमारजी*🌹

   🌻🌻   * स्वावलंम्बन का पाठ पढ़ाया लिटिल जान ने*🍁 🍁🍁🙌🙌                                   

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                  ता22/8/2018
                  वार🌞 बुधवार
              🌹श्रृंखला-642🌹
स्वावलंबन का पाठ पढ़ाया लिटिल जानने जब व्यक्ति अपने पुरुषार्थ के ऊपर भरोसा करता है तब वह औरों के लिए प्रेरणा प्रदान करने वाला बन जाता है ऐसा ही एक व्यक्तित्व लिटिल जान के रूप के अंदर उभरकर सामने आया लिटिल जान बचपन के अंदर बहुत ही गरीबी से गुजरा हुआ व्यक्ति तथा इसलिए वो जानता था गरीबी क्या होती है और गरीबी से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है जब वह अपने सामने किसी गरीब व्यक्ति को देखता तो उसका जो कलेजा है वह कलेजा धड़कने लग जाता बिना छत के गरीबों को देखकर उसका मन उन गरीबों के प्रति आकर्षित होने लग जाता और उन गरीबों को कैसे छत मिले और वह कैसे स्वावलंबी जीवन जी सकें इसके लिए मैं सोचना प्रारंभ कर देता था इसी कल्पना को साकार रुप देने के लिए उसने स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग के बाहरी क्षेत्र के अंदर एक लग्जरी गांव बनाने का संकल्प किया सोशल वाइट विलेज नाम के इस गांव में सिर्फ वही व्यक्ति रह सकते हैं जिन व्यक्तियों के पास के अंदर सर ढकने के लिए छत नहीं है ऐसे व्यक्ति वहां पहुंचने के बाद खाने-पीने की चिंता से मुक्त हो जाते हैं सात के अंदर वहां पर उसने एक प्रशिक्षण केंद्र भी प्रारंभ कर दिया जिस केंद्र के अंदर प्रशिक्षण लेकर गरीब व्यक्ति भी है अपने व्यक्तित्व को केशवकुमार वह निकाल सकता है आवाज के अंदर व्यक्ति 12 से 18 महीने तक रह सकता है उसके पश्चात वह जो हुनर सीखता है उसके अनुरूप उसको लिटिल जान सर्विस गिराने के लिए भी प्रयासरत होकर और उन को स्वावलंबी बनाने के लिए तैयार कर लेता है और ऐसे एक नहीं हजारों हजारों गरीबों को उसने पुरुषार्थ का पाठ पढ़ा कर स्वावलंबी जीवन जीने के लिए एक तरह से जीवनदायिनी बन गया ऐसे व्यक्तित्व जिस धरा पर उभर कर आते हैं वह धरा पर सब धरा बन जाती है लिटिल जान आज गरीबों के लिए मसीहा के रूप के अंदर उभरकर सामने आया है जिसने गरीबों के मन के अंदर पुरुषार्थ का दीपक जलाकर स्वावलंबी बनने की प्रेरणा प्रदान की

क्रमशः

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