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* आत्मरक्षा का सूत्र हे रक्षाबंधन*

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🌸ॐ भिक्षु      🕉   जय भिक्षु 🌸
   
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   🌻🌻   * आत्मरक्षा का सूत्र हे रक्षाबंधन*🍁 🍁🍁🙌🙌                                   

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                  ता26/8/2018
                  वार🌞 रविवार
     

आत्मरक्षा का सूत्र है रक्षाबंधन हर व्यक्ति के मन के अंदर हर समय सुरक्षा की भावना कायम रहती है कोई भी व्यक्ति अपने आप को असुरक्षित रखना पसंद नहीं करता है आत्मरक्षा का महत्वपूर्ण सूत्र है रक्षाबंधन जब रक्षाबंधन का पर्व आता है तब मन के अंदर एक नई प्रसन्नता की अनुभूति होने लग जाती है रक्षाबंधन का पर्व वास्तव के अंदर रक्षा को लेकर ही आता है भाई और बहन का एक अटूट रिश्ता होता है हर बहन का आधार स्थल रहता है भाई और सुख के समय नहीं दुख के समय तो भाई अवश्य ही याद आता है उस समय वह इनके मन के अंदर केवल अपने भाई के प्रति ही वह भावना रहती है तभी इस दुखद घड़ी के अंदर मेरा भाई अवश्य ही आकर मेरी रक्षा करेगा और भाई चाहे कुछ भी हो जाए अपनी बहन की रक्षा के लिए तो आधी रात को भी पहुंच जाता है इसलिए रक्षाबंधन का पर्व महीनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्व होता है और इस दिन वह अपने भाई के घर पर जाकर भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांध की है और यह वचन देती है भाई मेरी रक्षा के लिए तुम हर समय तत्पर और तैयार रहोगे भाई भी अपनी बहन को आश्वस्त और विश्वस्त करती है बहन तुम कोई चिंता मत करो हर हालत के अंदर मैं तेरे लिए सुरक्षा कवच का काम करूंगा धागे के अंदर वह ताकत और शक्ति होती है हर एक को अपनी ओर आकर्षित करने वाला होता है मेवाड़ की धरा पर जब आतताइयों के हमले होते हैं उस समय चित्तौड़ की महारानी कर्णावती सुरक्षा का कोई जरा अपने सामने नहीं देख कर अपने प्रतिपक्षी राजा हुमायूं को अपने हाथ से एक रक्षा कवच भेजती है और यह निवेदन करती है मैं आपको अपना भाई के रूम के अंदर स्वीकार कर रही हूं और यह प्रेम का धागा मैं आपके लिए भेजना भेज रही हूं इस धागे की आन और बान रखना अब मेरे भाई का दायित्व बनता है हुमायूं जैसा व्यक्ति भी उस धागे को देख कर अपने मन के अंदर प्रेम का स्रोत प्रवाहित करने लग जाता है कर्णावती को अपने भाई की याद आती है हुमायु रक्षा के लिए उपस्थित हो जाता है एक प्रेम के धागे हैं वह कार्य कर दिखाया जो तलवार नहीं कर सकती है वर्तमान परिवेश के अंदर जहां चारों तरफ असुरक्षा का वाचन बनता जा रहा है इसके लिए आवश्यक है प्रत्येक नागरिक के मन के अंदर प्रेम की भावना जागृत हो और वह प्रेम ही हमारी भी रक्षा कवच का काम कर सकता है जगदीप रक्षाबंधन का महान कार्य आता है उस समय प्रेम का धागा हमारे सामने आकर उपस्थित हो जाता है और वह धागा ही हमारी सुरक्षा के भेड़िए की अंदर रखने वाला है इस समय औसत प्रेम के धागे का स्मरण अवश्य करें तो हमारा रक्षाबंधन का यह पर्व प्रेरणादाई पर बन जाएगा

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