🍁☘🌿🍂🍁🌿☘💐💐
🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉
🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹
🌻 *गाथा तपोवल*3 🌻
📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕
🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया* 🍁🍁
🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
🙏🙏🙏🙏🙏
🌹श्रृंखला 112 🌹
श्रावक शिव लाल जी अपने आवास पर आराम से बैठे हुए थे। उस समय राजनगर बड़ेपाडे का एक व्यक्ति शिव लाल जी के पास में आता है ,प्रणाम करता है और नम्र निवेदन करता है हमारे बड़े पाडे के अंदर बडोला परिवार आर्थिक दृष्टि से बहुत ज्यादा संपन्न है पर सेठ साहब उनके जीवन में एक बहुत बड़ी कमी है और आप यदि उदारमना का परिचय दिराने की कृपा कराएं तो वह कमी अवश्य ही पूरी हो सकती है ।
शिव लाल जी ने सहजता के साथ पूछा ऐसी क्या बात है ?जो मेरे चाहने से वह कमी दूर हो सकती है ?तब आगंतुक व्यक्ति ने कहा शिव लाल जी का परिवार अर्थ की दृष्टि से तो परी संपन्न है पर पुत्र की दृष्टि से बिल्कुल खाली है ।यदि आप अपने मन को बड़ा बनाकर अपने तीन पुत्रों में से एक सुपुत्र को यदि वहां पर गोद रख दो तो हमारे सेठ साहब कि जो समस्या है वह समस्या एकक्षणमे समाप्त हो सकती है ।
आगंतुक के विचार सुनकर शिव लाल जी एक क्षण के लिए चिंतन की मुद्रा में अवस्थित हो जाते हैं ।वह चिंतन किस ओर गतिमान करेगा यह सारा भविष्य के गर्भ के अंदर समाहित है तथा आगंतुक का ध्यान शिवलाल जी के मुखारविंद के ऊपर अवस्थित हो जाता है। क्रमशः
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
🌸ॐ भिक्षु 🕉 जय भिक्षु 🌸
🕉🕉🕉🔯🕉🕉🕉
🌹🌹🌹 🎪 🌹🌹🌹
🌻 *गाथा तपोवल*3 🌻
📕 *बहुत कठिन है मार्ग तप का*📕
🍁🍁 *बोधि वृक्ष का मीठा फल:- मुनि चंपालाल जी मिठीया* 🍁🍁
🙌तपस्वी मुनी भूपेंद्र कुमार जी।🙌
🙏🙏🙏🙏🙏
🌹श्रृंखला 112 🌹
श्रावक शिव लाल जी अपने आवास पर आराम से बैठे हुए थे। उस समय राजनगर बड़ेपाडे का एक व्यक्ति शिव लाल जी के पास में आता है ,प्रणाम करता है और नम्र निवेदन करता है हमारे बड़े पाडे के अंदर बडोला परिवार आर्थिक दृष्टि से बहुत ज्यादा संपन्न है पर सेठ साहब उनके जीवन में एक बहुत बड़ी कमी है और आप यदि उदारमना का परिचय दिराने की कृपा कराएं तो वह कमी अवश्य ही पूरी हो सकती है ।
शिव लाल जी ने सहजता के साथ पूछा ऐसी क्या बात है ?जो मेरे चाहने से वह कमी दूर हो सकती है ?तब आगंतुक व्यक्ति ने कहा शिव लाल जी का परिवार अर्थ की दृष्टि से तो परी संपन्न है पर पुत्र की दृष्टि से बिल्कुल खाली है ।यदि आप अपने मन को बड़ा बनाकर अपने तीन पुत्रों में से एक सुपुत्र को यदि वहां पर गोद रख दो तो हमारे सेठ साहब कि जो समस्या है वह समस्या एकक्षणमे समाप्त हो सकती है ।
आगंतुक के विचार सुनकर शिव लाल जी एक क्षण के लिए चिंतन की मुद्रा में अवस्थित हो जाते हैं ।वह चिंतन किस ओर गतिमान करेगा यह सारा भविष्य के गर्भ के अंदर समाहित है तथा आगंतुक का ध्यान शिवलाल जी के मुखारविंद के ऊपर अवस्थित हो जाता है। क्रमशः
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
Comments
Post a Comment