Skip to main content

Life Mantra


          *LIFE MANTRA

*जब भी इस दुनिया में आते है कुदरत के घर से कुछ खास Qualities लेकर आते है... और यही Qualities हमें सबसे अलग रखती है, सबसे Different बनाती है। मगर कभी कभी आपका ज्यादा Sincere... ज्यादा Honest... और ज्यादा Innocent होना... आपके आस-पास आपके लिये मुसीबतों के कांटो की दीवारे खड़ी कर देता है। अपने Ideas का अपने Thoughts का अपने Plans का किसी को Shareholder मत बनाइये। किसी को अपनी Qualities का Kidnap मत करने दीजिये। अपने विचारों, अपनी आदतों का Copyright बनाइये ताकि कोइ उसे चुरा ना सके।*

*आप जो भी है सबसे अलग, सबसे हटकर सबसे Unique है, एसे अपने यूनिकनेस का किसी को अपनी विरासत ना बनाने दे, पैसे, Precious Diamond, Jewellery, की तरह अपने Ideas.... अपने Plans, अपने विचारों को Safety Box में Secure रखें ताकि कोइ आपके ही Ideas को लेकर पुरी दुनिया में फैल जाये और आप तमाशबीन होकर देखते ही रह जाये।*

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
*🙏🏻मेरे द्वारा हुइ देरी के लिये क्षमा चाहूँगी।*
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆

Comments

Popular posts from this blog

संयुक्त परिवार के लाभ

Kahani ( कहानी )हृदय परिवर्तन

🌷🌷🌷हृदय परिवर्तन 🌷🌷🌷 . एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। . एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया। . उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया। . राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें। . सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी। नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा - . बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई। एक पलक के कारने, ना कलंक लग जाए। . अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला। तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा। . जब यह बात गुरु जी ने सुनी। गुरु जी ने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं। . वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया। . उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया। . नर...

Kavita: ऐ सुख तू कहाँ मिलता है..

Very Beautifully Written...👌😊 ऐ सुख तू कहाँ मिलता है..ऐ सुख तू कहाँ मिलता है.. क्या तेरा कोई स्थायी पता है.. क्यों बन बैठा है अन्जाना.. आखिर क्या है तेरा ठिकाना.. कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको.. पर तू न कहीं मिला मुझको.. ढूंढा ऊँचे मकानों में.. बड़ी बड़ी दुकानों में.. स्वादिस्ट पकवानों में.. चोटी के धनवानों में.. वो भी तुझको ढूंढ रहे थे.. बल्कि मुझको ही पूछ रहे थे.. क्या आपको कुछ पता है.. ये सुख आखिर कहाँ रहता है..? मेरे पास तो दुःख का पता था.. जो सुबह शाम अक्सर मिलता था.. परेशान होके रपट लिखवाई.. पर ये कोशिश भी काम न आई.. उम्र अब ढलान पे है.. हौसले थकान पे है.. हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास.. अब भी बची हुई है आस.. मैं भी हार नही मानूंगा.. सुख के रहस्य को जानूंगा.. बचपन में मिला करता था.. मेरे साथ रहा करता था.. पर जबसे मैं बड़ा हो गया.. मेरा सुख मुझसे जुदा हो गया.. मैं फिर भी नही हुआ हताश.. जारी रखी उसकी तलाश.. एक दिन जब आवाज ये आई.. क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई.. मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ.. तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ.. मेरा नही है कुछ भी मोल.....