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अपनी गालियाँ रखो ...अपने पास*

         *अपनी गालियाँ रखो ...अपने पास*

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भगवान् बुद्ध के पास एक आदमी आया


और


बड़ी देर तक अपशब्दों की बौछार करता रहा |


आखिर गालियाँ देते-देते थक गया |


दस गाली के बदले अगर एक गाली उत्तर में मिल जाए तो


अगली बीस गालियों से स्वयं को लैस कर लेता है |


जोश दुगुना.....


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उस आदमी ने बुद्ध से कहा -


" क्या बात है ?


तुम्हारी जीभ गायब हो गयी क्या ?


जवाब क्यों नहीं देते ?"


बुद्ध ने कहा -

" मैंने तुम्हारे अपशब्द स्वीकार ही नहीं किये तो क्या जवाब दूं ?"

उस व्यक्ति ने कहा -

" स्वीकार न करने का मतलब ?"

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बुद्ध ने कहा -

" दूसरों को भेंट देने की प्रथा तुम्हारे यहां भी होगी |

अगर एक थाल मिठाई भर कोई तुम्हारे पास जाता है

और

तुम् स्वीकार नहीं करते तो वह थाल कहां जाएगा ?"

गाली देने वाले ने कहा -

" जाएगा कहाँ, वह तो उसी के पास रह जाएगा,

जो देने आया था |"

बुद्ध बोले -

" तुम्हारी गालियाँ भी तुम्हारे पास ही रह गई,

क्योंकि मैंने उसे स्वीकार नहीं किया |"

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