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*स्पर्श गुंजन*


🌹🌹 *स्पर्श गुंजन* 🌹🌹

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कभी - कभी  चलते - चलते  राहों में,
अनायास  ही  अवसर मिल जाते हैं ।
उम्मीद  होती  जहां  फूल खिलने कि,
वहां  फूलों  के  चमन खिल जाते हैं ।

मेहरबान  होता   है  जब  ऊपरवाला,
खुशियों  के  सावन  बरस  जाते  हैं ।
चल  कर   आती  मानो  जन्नत  द्वारे,
अप्रत्याशित  अवसर  मिल जाते हैं ।

जरा संभल के चलना उस वक्त यारों,
कहीं  कदम  अपने  बहक ना जाए ।
जो मिले हैं मौके जिंदगी को राहों में,
आते आते हाथों से फिसल ना जाए।

देते  हैं  मौक़े जिंदगी को नई दिशाएं,
अपनी  सोच  जरा परिपक्व बनाएं ।
कौन  सी  राह  *"स्पर्श"* करनी है हमें,
सोच  समझकर  जरा कदम बढ़ाए ।

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