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■ पुरूषार्थ की धारा ■*

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   *■  पुरूषार्थ की धारा  ■*
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*1-सीख मिलती नही, ली जाती है।*

*2-लीक से हटकर चलने वाले, जीवन भर कुछ न कुछ सीखते रहते हैं।*

*3-प्रतिभाएं, परिस्थिति की शिकायत नही करती हैं।*

*4-बढ़ने वाले सिर्फ बढ़ने वालों को देखते हैं, रुकने या थकने वालों को नही।*

*5-भाग्य उनका साथ देता है, जो प्रमाद में समय नही गवाते हैं।*

*6-बुद्धि मिली है तो उसे लगाइये, बुद्धू बनकर उसे मत गवाईये।*

*7-सबका अच्छा सोचिये, आपका अपने आप अच्छा हो जायेगा।*

*8-भोगों में दुख न लगना, आपके भोगी होने की निशानी है।*

*9-पुरानी बातें याद करके, नया समय खराब मत करो।*

*10-उल्टा सोचने वाले थकते हैं और सीधा सोचने वाले सफलता के मार्ग लगते हैं।*
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   *■ जैनम् जयति शासनम् ■*

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