*सामायिक क्या है......*
महावीर की अंतिम देशना अंतराय अध्यन सूत्र के 29 वें अध्यन में की सामायिक करने से जीव को क्या लाभ होता है? महासती जी डॉ पूण्यशीला जी मा:सा ने फरमाया की एक लड़का हाथ में मशाल लेकर रास्ते में चल रहा था की दोपहर के 12 बजे तेज धूप है। प्यास से आकुल -व्याकुल हो रहा था सामने से एक सज्जन आ रहा था उसने देखा सामने ही वटवृक्ष है उसके नीचे बैठ जायेगा तो शीतलता प्राप्त होगी। उसने उस लड़के से कहा अरे तुम ईस वृक्ष नीचे बैठ जाओ तो तुम्हें शीतलता मिलेगी। वह लड़का वहाँ जाकर रुकता है पर उसे शीतलता नहीं मिलती है। क़्या कारण है उसका उसके हाथ में जलती मशाल थी उसके ताप के कारण शीतलता नहीं प्राप्त हुयी।
ठीक उसी प्रकार सामयिक में मानव को शीतलता प्राप्त होती है, पर कब जब हम सामयिक करते समय संसार की जलती मशाल का सारा कचरा चप्पल के साथ बाहर ही छोड़ देना है अगर लेकर बैठे तो सामयिक में शितलता प्राप्त नहीं होगी। सामायिक यह धर्म का एंट्री डोर है इसमें से आगे बढ़कर 1st क्लास से होते-होते अंतिम क्लास यानि मोक्ष तक पहुँचना है। सामायिक यानि संभाव में आना है सुख-दुःख कुछ भी आये तो समभाव रहेगी तो आपकी सामायिक सार्थक हो गई समझना। पर अगर सामायिक से परिवर्तन ना हो तो उस सामायिक की कोई सार्थकता नहीं है। सामायिक यह विधि से की गई तो सामायिक में रंग आयेगा सिथिप्रगता प्राप्ती ही सामायिक का लाभ है। कर्म 8 है, सामायिक के पाठ 8 है, शिद्ध के आठ गुण हैं, जो सामायिक करते हैं उनके आठ कर्मो का छय होकर वे सिद्ध के 8 गुणों को प्राप्त होते हैं।
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महावीर की अंतिम देशना अंतराय अध्यन सूत्र के 29 वें अध्यन में की सामायिक करने से जीव को क्या लाभ होता है? महासती जी डॉ पूण्यशीला जी मा:सा ने फरमाया की एक लड़का हाथ में मशाल लेकर रास्ते में चल रहा था की दोपहर के 12 बजे तेज धूप है। प्यास से आकुल -व्याकुल हो रहा था सामने से एक सज्जन आ रहा था उसने देखा सामने ही वटवृक्ष है उसके नीचे बैठ जायेगा तो शीतलता प्राप्त होगी। उसने उस लड़के से कहा अरे तुम ईस वृक्ष नीचे बैठ जाओ तो तुम्हें शीतलता मिलेगी। वह लड़का वहाँ जाकर रुकता है पर उसे शीतलता नहीं मिलती है। क़्या कारण है उसका उसके हाथ में जलती मशाल थी उसके ताप के कारण शीतलता नहीं प्राप्त हुयी।
ठीक उसी प्रकार सामयिक में मानव को शीतलता प्राप्त होती है, पर कब जब हम सामयिक करते समय संसार की जलती मशाल का सारा कचरा चप्पल के साथ बाहर ही छोड़ देना है अगर लेकर बैठे तो सामयिक में शितलता प्राप्त नहीं होगी। सामायिक यह धर्म का एंट्री डोर है इसमें से आगे बढ़कर 1st क्लास से होते-होते अंतिम क्लास यानि मोक्ष तक पहुँचना है। सामायिक यानि संभाव में आना है सुख-दुःख कुछ भी आये तो समभाव रहेगी तो आपकी सामायिक सार्थक हो गई समझना। पर अगर सामायिक से परिवर्तन ना हो तो उस सामायिक की कोई सार्थकता नहीं है। सामायिक यह विधि से की गई तो सामायिक में रंग आयेगा सिथिप्रगता प्राप्ती ही सामायिक का लाभ है। कर्म 8 है, सामायिक के पाठ 8 है, शिद्ध के आठ गुण हैं, जो सामायिक करते हैं उनके आठ कर्मो का छय होकर वे सिद्ध के 8 गुणों को प्राप्त होते हैं।
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