ॐ भिक्षु
*(लय: जय गणेश-२ देवा)*
ओम भिक्षु- २ ओम भिक्षु स्वामी
दीपा के दुलारे प्यारे प्रभु अन्तरयामी...। ।ओ। ।
रोग मिटे शोग मिटे बाधा मिटे सारी,
हमने तो अजमाया भिक्षु, नाम चमत्कारी । । १ । ।
सुख में सहारा भिक्षु, दुख में सहारा,
संकटमोचन वाला भिक्षु जाप है तुम्हारा । । २ । ।
सुबह हो या शाम, चाहे सोतेे उठते बोले,
मंत्राक्षर सम नाम तेरा अन्तरपट खोले । । ३। ।
रिद्धि मिलै सिद्धि मिलें, जपे तेरी माला,
भक्ति में है शक्ति बाबा कर दो उजाला । । ४ । ।
आँख मूंद ध्यान धरे गुंजें नाम तेरा
सिरियारी के संत भिक्षु दिल में करो बसेरा । । ५ । ।
*रचियता: साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी*
*आचार्य श्री महाश्रमण जी के मुख से भावांजलि*
Download :
https://drive.google.com/file/d/1WPK5Qe5V5zCCJLT-nrT78clxCNJJ_8QR/view?usp=drivesdk
*(लय: जय गणेश-२ देवा)*
ओम भिक्षु- २ ओम भिक्षु स्वामी
दीपा के दुलारे प्यारे प्रभु अन्तरयामी...। ।ओ। ।
रोग मिटे शोग मिटे बाधा मिटे सारी,
हमने तो अजमाया भिक्षु, नाम चमत्कारी । । १ । ।
सुख में सहारा भिक्षु, दुख में सहारा,
संकटमोचन वाला भिक्षु जाप है तुम्हारा । । २ । ।
सुबह हो या शाम, चाहे सोतेे उठते बोले,
मंत्राक्षर सम नाम तेरा अन्तरपट खोले । । ३। ।
रिद्धि मिलै सिद्धि मिलें, जपे तेरी माला,
भक्ति में है शक्ति बाबा कर दो उजाला । । ४ । ।
आँख मूंद ध्यान धरे गुंजें नाम तेरा
सिरियारी के संत भिक्षु दिल में करो बसेरा । । ५ । ।
*रचियता: साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी*
*आचार्य श्री महाश्रमण जी के मुख से भावांजलि*
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