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*दिल को छूने वाली कविता*

 
*दिल को छूने वाली कविता*

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हार  कर  कभी  निराश ना होना यारों,
हार  से ही जीत की राहें निकलती है ।
जीत  कर  कभी  गर्व  ना करना यारों,
गर्व  से  जिंदगी  की  राहें बदलती है ।

जीत हार तो सबक है जिंदगी के लिए,
आगे  बढ़ने  की  नई  राहें मिलती है ।
हार  से  संभल  जाते  हैं  कदम  यारों,
तो  जीत  से  नई कलियां खिलती है ।

बस  बढ़ते  रहो  अपने कर्म - पथ पर,
नहीं  हार  का मन में कोई विषाद हो ।
*"स्पर्श"* हो खुशी जीत की जरूर मगर,
नहीं जीत का मन में कोई उन्माद हो ।

जीत हार  को तौलो सदा समभावों से,
अंतस में यहीं सदा उत्कृष्ट विचार हो ।
जिंदगी जियो तो जिंदादिली से जिओ,
मन सदा ही स्वच्छ और निर्विकार हो।

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d🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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