*दिल को छूने वाली कविता*
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हार कर कभी निराश ना होना यारों,
हार से ही जीत की राहें निकलती है ।
जीत कर कभी गर्व ना करना यारों,
गर्व से जिंदगी की राहें बदलती है ।
जीत हार तो सबक है जिंदगी के लिए,
आगे बढ़ने की नई राहें मिलती है ।
हार से संभल जाते हैं कदम यारों,
तो जीत से नई कलियां खिलती है ।
बस बढ़ते रहो अपने कर्म - पथ पर,
नहीं हार का मन में कोई विषाद हो ।
*"स्पर्श"* हो खुशी जीत की जरूर मगर,
नहीं जीत का मन में कोई उन्माद हो ।
जीत हार को तौलो सदा समभावों से,
अंतस में यहीं सदा उत्कृष्ट विचार हो ।
जिंदगी जियो तो जिंदादिली से जिओ,
मन सदा ही स्वच्छ और निर्विकार हो।
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