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*■ पुरूषार्थ की धारा ■*
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*1-भूल सुधार लो वरना मुक्ति जा पाओगें, ये भूल जाओ।*
*2-भूल एक समय की है पर जब तक वो भूल नही लगेगी तो निकलेगी कैसे ?*
*3-अपने आत्मा को भूलना ही, सबसे बड़ी भूल है।*
*4-भूलनें वाली बातें याद रखोगे तो याद रखने वाली बातें भूल जाओगें ?*
*5-सबको भूलेला भगवान न देखना भी, एक बहुत बड़ी भूल है।*
*6-तात्विक श्रम बिना, भ्रम दूर होना असंभव है।*
*7-शक्ति को पहचानना और शक्ति को सम्हालना, शक्तिवान होने का ये ही उपाय है।*
*8-समय की खराबी करना, सबसे खराब कार्य है।*
*9-जो अपना शील नही बचाते हैं वो मोक्षमार्ग में फेल हो जाते हैं।*
*10-क्षयोपशम में जिनवाणी रहना अलग बात है और उसे जीवन में लगाना अलग बात है।*
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*■ जैनम् जयति शासनम् ■
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*Date : 09/07/2018*
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*■ पुरूषार्थ की धारा ■*
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*1-भूल सुधार लो वरना मुक्ति जा पाओगें, ये भूल जाओ।*
*2-भूल एक समय की है पर जब तक वो भूल नही लगेगी तो निकलेगी कैसे ?*
*3-अपने आत्मा को भूलना ही, सबसे बड़ी भूल है।*
*4-भूलनें वाली बातें याद रखोगे तो याद रखने वाली बातें भूल जाओगें ?*
*5-सबको भूलेला भगवान न देखना भी, एक बहुत बड़ी भूल है।*
*6-तात्विक श्रम बिना, भ्रम दूर होना असंभव है।*
*7-शक्ति को पहचानना और शक्ति को सम्हालना, शक्तिवान होने का ये ही उपाय है।*
*8-समय की खराबी करना, सबसे खराब कार्य है।*
*9-जो अपना शील नही बचाते हैं वो मोक्षमार्ग में फेल हो जाते हैं।*
*10-क्षयोपशम में जिनवाणी रहना अलग बात है और उसे जीवन में लगाना अलग बात है।*
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*■ जैनम् जयति शासनम् ■
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*Date : 09/07/2018*
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