🌹🌹 *स्पर्श गुंजन* 🌹🌹
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ना रोक आंसुओं को, उन्हें बह जाने दे ।
दर्द छुपा जो दिल में, उन्हें कह जाने दे ।
डर - डर के बहुत सहे, सितम दिल ने,
दीवार चुप्पी की जरा, अब ढ़ह जाने दे ।
गुबार निकला है दिल से, निकल जाने दे।
तूफान मचला है दिल में, मचल जाने दे ।
बरसों बाद बरसा है, कोई सावन आज,
बूंदे बंजर मन पे ज़रा, उछल जाने दे ।
चल पड़े हैं कदम तो, अब चल जाने दे ।
बदल रहा है मौसम तो, बदल जाने दे ।
*"स्पर्श"* होने को आतुर है, नवप्रभात अब,
ढल रही है शाम अंधेरी, जरा ढल जाने दे।
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